Thursday, April 23, 2015

नहीं चाहिए । don't want

मां
तूने तो कहा था,
वो मालिक हम सब का हैं।
वो सबके साथ न्याय करता हैं।
बुरे का बुरा भले का भला करता है।
फिर क्या गलती थी मां अपनी
क्यों झुलस गई मां फसल अपनी।
क्यूँ बर्बाद हो गयी मां गृहस्थी अपनी।

मां तूने तो कहा था।
वो नेता हैं।
उन्हें हम चुनते हैं।
वो हमारे सेवक हैं।
फिर क्यों हर्जाने के बस अठरा रूपये देते है।
बर्बादी पर इन्हें आंसू तक ना आते है।
हमें छू कर ये डेटाल से नहाते हैं।

मां तूने तो कहा था।
वो मीडिया है।
सच का साथ देती है।
सब के लिए लड़ जाती है।
फिर क्यों वो सिफर दोषारोपण करती है।
हमारे आंसू नहीं पोछती पर दिखाने को रोती है।
कहती सब है पर छिछला लगता हैं।

मां तूने तो कहा था।
वो हमारा हमदर्द हैं।
दुःख सुख समझता है।
हमारे संग खड़ा होता है।
फिर क्यों दो दिन से पूरा परिवार भूखा है।
तेरे गहने लेकर भी पटवारी तुझे छूता है।
बापू फांसी पर झूल गए है।
दिदिया का बियाह टूट गया है।
कहा है मां वो साथी अपना।
जो कहता था लड़ जाने की
मर मिटके हक लाने की।

हक नही चहिये अब मां मुझको।
बस दो जून की रोटी दे दो
तन पे कुछ कपड़े दे दो।
बापू की लाश भी हमे दे दो।
नहीं बनना हमे कोई नेता
बस हमे पैर पे खड़े रहने की हिम्मत दे दो।
भीख मत दो
बस इस आत्म सम्मान का मखौल उड़ाना छोड़ दो।
छोड़ दो।


© आशिता दाधीच
#Instant #poem #AshitaD #AVD

दौसा के किसान गजेन्द्र सिंह के आम आदमी पार्टी आप की रैली में फांसी लगा लेने पर

Farmer from dausa rajasthan committed sucide in aap s delhi rally 



1 comment: