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Wednesday, September 21, 2016

Amitabh Bachchan

अमिताभ बच्चन

कौन हो आप।

अभी अभी पिंक फिल्म देख कर लौटी, हमेशा शांत रहने वाले भायंदर के मैक्सस मॉल में, आज पहली बार मैंने सीटियां बजते सुनी, तालियां गूंजते देखी, मैक्सस वो मॉल जिसमें मैंने कहानी भी देखी और बीएपास भी, रागिनी एमएमएस और क्वीन भी, भाग मिल्खा भी और हाउसफुल भी, रामलीला भी और रुस्तम भी। हमेशा शांत सा ऊंघता यह थियेटर आज नाच उठा,
और उसके साथ मेरा भी सर ऊंचा हो गया, औरतों के सम्मान की तरफ दिए गए इस उपहार के लिए।

शुक्रिया अमिताभ बच्चन, दीपक सहगल को जीने के लिए।

पर एक बात बताइये,

आप है कौन,
इंसान तो लगते नहीं, हमारी तरह रक्त मांस के बने, आज पच्चीस की उम्र के काम हमे थका ड़ालता है पर आप वक्त की आँखों में आँखे ड़ाल कर कैसे उसे पीछे छोड़े जा रहे है।
जब दीपक सहगल मॉर्निंग वॉक के दौरान hoddiee से मुंह ढंकती प्रोटोगोनिस्ट के चहरे से कपड़ा पीछे करके उसे मुंह दिखाने को कहते है तो अपने औरत होने पर गर्व होता है।

अमिताभ बच्चन
कौन हो आप।
वजीर वाले वो असहाय बुजुर्ग जो आखिरी में सबसे बड़ा सबल होकर निकला या तीन का वो बुजुर्ग जो कुछ न होकर भी सब कुछ कर गया, या कहानी की वो आवाज जो दिखी नहीं पर दिल में समा गई। या बुड्ढा होगा तेरा बाप का वो जवान जिस पर हर युवती दिल हार गई।

या फिर वो विजय और अमित जो अपने बाप को आँख मिला कर कहा सकता था "मैं नाजायज औलाद नहीं बल्कि आप नाजायज बाप हो"
वो निहायत ही दुबला पतला लड़का जिसे मैंने बचपन में दूरदर्शन की फिल्मों में देखा।
जो गुंडों के गोदाम में अकेला जा बैठा और उन्ही को पीट पाट के बाहर आ गया।
जो बंगला गाडी होने के बावजूद भी माँ के लिए तरस गया, माँ का न होना क्या है अपनी आँखों से जता गया।
जो अपने दोस्त वीरू का ऐसा रिश्ता ले कर गया कि आज भी हम पेट पकड़ कर हंस सके।
जो आजादी के बाद मुलभुत आवश्कयता से जूझता भारत का युवा था, जिसे सिस्टम के लिए गुस्सा था, जिसे बदलाव लाना था, जो बेहतर जिंदगी चाहता था, जो रोजमर्रा की तकलीफों से आजिज था।
जिसे माँ बहन और बीबी के काँधे पर सर रख जार जार रोना था, जो मजबूत भी था और मजबूर भी, जो दयनीय भी था और दयावान भी।
जो मोहब्बते का कड़क प्रफेसर था और बागबान का प्यारा सा बाप और बाबुल का ससुर।
कभी बेटे के लिए कभी बहु के लिए, जो बाबुल और विरुद्ध बन कर ड़ट गया,

तुम्हारे हथियार बदल गए
और आप मुख्यधारा में बने रहे
उसका केंद्र बिंदु बन कर

अब आप अपनी माँ का बदला लेने के लिए अग्निपथ पर चल कर पेट्रोल पंप नहीं जलाते, बल्कि बेटी की मौत का बदला लेने के लिए बादशाह बन कर एक पुलिस वाले को अपना वजीर बना कर दुश्मन को घर में घुस कर मारते है।

अब आप सुनसान राहो पर एक मसीहा बन कर नहीं निकलते बल्कि काला कोट पहनकर न सिर्फ पिंक लड़कियों बल्कि पूरी औरत जात के लिए लड़ जाते है।

गजब है आप
अद्भुत

वक्त के साथ चलकर कदम ताल मिला कर वक्त को पछाड़ते है आप।
कितना कुछ सिखाते है।

जो नव्या और आराध्या के बहाने खत लिख कर हमें जीना सिखाते है।
जो औरो बन कर सुपर हैंडसम से सुपर क्यूट हो जाते है।

थैंक यू अमिताभ बच्चन

हमे जीना सिखाने के लिए
हंसने की वजह देने के लिए
प्रेम सिखाने के लिए
दिल में ख्याल लाने के लिए
होली खेलने के लिए
दीवाली मनाने के लिए
बिल्ला नम्बर 786 बाँधने के लिए

अनगिनत बार जात पात धर्म से ऊपर उठा कर एक करने के लिए

शुक्रिया
अमिताभ बच्चन

आपके अरबो फैन में से एक
●आशिता

©आशिता दाधीच


Sunday, May 6, 2012

सेलेब्रिटी होने की कीमत


आये दिन अखबार अटे पड़े रहते हैं, ऐश्वर्या राय बच्चन के वजन से जुड़े समाचारों से. प्रेगनेंसी के पांच महीने बीतने के बाद ऐश्वर्या राय का बढ़ता मोटापा इन दिनों हर तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है. मोटी हो जाने के कारण बच्चन बहू की कुछ लोग आलोचना भी कर रहे हैं. हाल ही में मुकेश अंबानी की पार्टी में पहुंची ऐश की तस्वीरें प्रकाशित होने के बाद चर्चाओं का दौर शुरू हुआ है. तस्वीरों के इंटरनेट और सोशल मीडिया में आने के बाद लोग इस पर बिल्कुल हैरान हैं। कुछ का कहना है कि ऐश्वर्या अपने वजन को को लेकर गंभीर नहीं है  तो कुछ लोग जोर शोर से उनकी मजाक उडा रहे हैं. लेकिन क्यू यह हैं बहुत स्वाभाविक प्रक्रिया हैं जब गर्भावस्था के दौरान एक स्त्री का वजन बढ़ जाता हैं. इस दौरान उनके शरीर में दो जाने पलती हैं और अपने बच्चे के उत्तम स्वास्थ्य के लिये उसे विटामिन युक्त संतुलित आहार लेना ही होता हैं. बच्चे के जन्म के बाद ज्यादातर माएं मोटी हो ही जाती हैं जो अपने आप ठीक हो जाता हैं. कहते हैं माँ बनकर ही एक औरत को अपने औरत होने पर घमंड होता हैं माँ बनकर ही वह अपने आप को पूरी तरह से औरत महसूस करती हैं. माँ होंने का एहसास एक औरत का और भी खूबसूरत बना देता हैं. यही बात बच्चन बहु पर भी तो लागू होती हैं. वह नारी होने के सुख को उठा रही है क्या हक है हमे उनके इस सुख में खलल डालने का.

किसी भी अन्य महिलाओं की तरह ही गर्भावस्था में बढ़े वजन को घटाने में उन्हें कुछ समय लगेगा ही. वह एक बड़ी  सेलिब्रिटी हैं और हमें उनकी दाद देनी चाहिए की वह इस रूप में भी मीडिया के सामने आने से नहीं हिचकिचा रही हैं. वे अपने मातृत्व का सुख ले रही हैं. एक माँ होने के एहसास को महसूस कर रही हैं एन्जॉय कर रही हैं. प्रेगनेंसी के बाद वजन कम करने में वक्त लगता है.  ऐश के वजन को लेकर लोग इतने चिंतित क्यों हैं यह उनका पर्सनल मुद्दा हैं जन उन्हें व्यावसायिक तौर पर या फिल्मो के लिये या फिर अपने व्यक्तिगत जीवन में वजन कम करने की जरुरत महसूस होगी वे कर लेंगी. इसके लिये उनपर बाहर से दवाब बनाने की जरुरत क्या हैं. क्या एक मशहूर सेलेब्रिटी होंने का यही हर्जाना हैं कि आप उनके व्यक्तिगत जीवन को लेकर इतना चिंतित हो उसमे इतना दखल करे. स्टारडम की यह कीमत तो नहीं कि आप अपने बेहद व्यक्तिगत क्षणों का लोगो को मजाक उड़ाने दे. इतनी बड़ी सेलिब्रिटी होने के बावजूद वह अपने आपको छुपा नहीं रही हैं और मातृत्व का भरपूर आनंद ले रही हैं यह अच्छी बात है. वह इस वक्त को एन्जॉय कर रही हैं जब वजन कम करना होगा कर लेंगी. ऐसे में इस बात को लेकर इतना हो हल्ला मचाने की क्या जरुरत है. हम उन्हें प्यार करते हैं उन्हें सुनहरे पर्दे पर देखना चाहते हैं ठीक हैं. लेकिन क्या इसके लिये हम उन्हें वक्त नहीं दे सकते. अनर्गल और बेतुकी बाते करने से क्या सिद्ध होगा. क्या हम अपनी विश्व सुन्दरी को उनका जीवन उसके अनुसार नहीं जीने देंगे?